गुड़ी पड़वा , गुड़ी पड़वा की परम्परा,गुड़ी पड़वा का महत्व,रीति-रिवाज,कथा,आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व
गुड़ी पड़वा गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa) हिंदू नववर्ष की शुरुआत का पर्व है , जिसे मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है। गुड़ी (विजय ध्वज) इसे चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है। इस दिन से विक्रम संवत् और शालिवाहन शक संवत् का नया साल शुरू होता है। गुड़ी पड़वा एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जो महाराष्ट्र और अन्य क्षेत्रों में मनाया जाता है। यह त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है, जो आमतौर पर मार्च या अप्रैल में पड़ता है। गुड़ी पड़वा की परम्परा: गुड़ी पड़वा की परम्परा में कई रीति-रिवाज शामिल हैं: 1. गुड़ी की स्थापना: घर के आंगन में एक गुड़ी (एक प्रकार का ध्वज) स्थापित किया जाता है, जो विजय और समृद्धि का प्रतीक है। 2. पूजा-अर्चना: घर में पूजा-अर्चना की जाती है, जिसमें भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा की जाती है। 3. विशेष भोजन: गुड़ी पड़वा के दिन विशेष भोजन बनाया जाता है, जिसमें पुरण पोली, श्रीखंड और अन्य पारंपरिक ...